सुना है उनके वक़्त की बड़ी अहमियत है

तो जा, अपना वक़्त मुझपे जाया न कर…

मेरे प्यार को किसी पैमाने में नापने की औकात नहीं तेरी

तू मेरे दर्द दिल की गहराई को आजमाया न कर…

बरसों से मुश्किलों से दो दो हाथ किए है मैंने

अब तेरे दर्द से आबरू हो जाऊ,ऐसी फरमाइश फ़रमाया न कर…

दो वक़्त का सुकून मुवस्सर नहीं मुझे,

तू बार बार आकर मेरे दिल को भरमाया न कर…

Author: Smit Singh

दूर समुन्दर...इक़ कश्ती...हवा का झोंका और एक आवाज़

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