सोचने के लिए ही सही

तेरा ख्याल अच्छा है…

वापस मुड़ के ना देख

बड़ी मुश्किल से दिल को मैंने बख्शा है….

लोग हसते है पीठ पीछे,कोई तो जनाब बात होगा

लगता है रोग तुम्हारा, जरूर लाइलाज होगा

माना तुम्हे डर नहीं है चाकुओं की छुरियो का (ज़ुबान)

लगता है तुम्हे बचाने वाला,जरूर कोई कद्रदान होगा

मै भी ढूंढ रहा हूं शहर दर शहर अपने हमसफ़र को

कभी ऊपरवाला भी मुझपर मेहरबान होगा

फरिश्तों ने की है बेईमानी, उनका भी क्या औकात रह गया

सारी कायनात दे गया उसको ,तेरे हिस्से सिर्फ मकां रह गया

सारे चमन का नूर कुर्बान किया तूने उसपर

तेरे खातिर सिर्फ उसका वास्ता रह गया

दौलत नहीं शोहरत नहीं, दोस्त रकीब कमाए थे उसने

कारवां तो उसके साथ भी था पर मुसाफिर अकेला रह गया

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चिंगारी उठी,जल उठा शहर..

इंतजार में रह गया मांझी, पहर दर पहर

धुंध छाया है तहज़ीब पर मगर

छाले है पैरो में, जाएगा कैसे भागकर

कीमत नहीं आंसुओ की,कुछ न मिलेगा इन्हे बेचकर

डाकू ही तेरे मुनसीब है ,खुश होंगे तुझे लूटकर

दवाओं के तस्कर है, बाटेंगे ही जहर

फिर लगने दे आग को हवा, मचने दे कहर…

उठने दे चिंगारी, फिर से जलने दे शहर….

अक्सर नए जमाने में नए दस्तूर पनप जाते है,

कुछ बनते है कुछ बिगड़ जाते है,

फूलो से खिलते है कुछ,तो कुछ कांटो में उलझ जाते है,

हर दिन इन रिश्तों को मालो में पिरोकर रखना पड़ता है,

क्योंकि एक झटके लगते ही फिर टूटकर बिखर जाते है……

feel the pain

हमारी जीवन में उन्होंने प्रवेश किया, बनके विद्युत जनित टरबाईन….

तब मार दिया मैंने भी, विद्युत के वेग से उनको लाईन..

दिल के अरमानों पर, फिर से कर दिया साईन…

आया उनका चप्पल करते हुए फ़्लाइंग,

अब जा रहा हूं भरने, थाने में फाइन….

आलू से मासूम दिल को मेरे, कुचल के बनादी भर्ता….

कल ही लगने वाली जलपरी, अब लग रही है डाइन…..

कौन?

कुछ लोग कहते है भाई तु रातो को सोता क्यों नही…अब उन सबको कैसे समझाऊ ….

चाँद न हो तो चांदनी को तराशेगा कौन

भरी महफ़िल मे शायरी ए अल्फ़ाज बोलेगा कौन

टिमटिमाते सितारों के बीच तन्हा है खड़ा चाँद यूँ ही

अगर वो ही न निकला तो हम जुगनुओं को रास्ता दिखायेगा कौन

बेख़बर सोती है जिसमे है मेरी दुनिया

अगर हम भी सो गए तो उसे याद करेगा कौन…